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महाभारत 154.40

एवमुक्तस्ततो भीमः सृक्किणी परिसंलिहन्
स्मयमान इव क्रोधात्साक्षात्कालान्तकोपमः
बाहुसंरम्भमेवेच्छन्नभिदुद्राव राक्षसम्

पूरा अध्याय