ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 154154.18महाभारत 154.18एतामद्य परामृश्य स्त्रियं राक्षस मानुषीम् विषमेतत्समालोड्य कुम्भेन प्राशितं त्वयापिछलाअगलापूरा अध्याय