ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 148148.20महाभारत 148.20चातुराश्रम्ययुक्तेन कर्मणा कालयोगिना अकामफलसंयोगात्प्राप्नुवन्ति परां गतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय