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महाभारत 146.40

लतावल्लीश्च वेगेन विकर्षन्पाण्डुनन्दनः
उपर्युपरि शैलाग्रमारुरुक्षुरिव द्विपः
विनर्दमानोऽतिभृशं सविद्युदिव तोयदः

पूरा अध्याय