Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 146.15

रुक्मपृष्ठं धनुर्गृह्य शरांश्चाशीविषोपमान्
मृगराडिव संक्रुद्धः प्रभिन्न इव कुञ्जरः

पूरा अध्याय