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महाभारत 134.28

श्लेष्मातकी क्षीणवर्चाः शृणोषि; उताहो त्वां स्तुतयो मादयन्ति
हस्तीव त्वं जनक वितुद्यमानो; न मामिकां वाचमिमां शृणोषि

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