Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 133.4

ऐन्द्रद्युम्नेर्यज्ञदृशाविहावां; विवक्षू वै जनकेन्द्रं दिदृक्षू
न वै क्रोधाद्व्याधिनैवोत्तमेन; संयोजय द्वारपाल क्षणेन

पूरा अध्याय