ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 133133.12महाभारत 133.12न हायनैर्न पलितैर्न वित्तेन न बन्धुभिः ऋषयश्चक्रिरे धर्मं योऽनूचानः स नो महान्पिछलाअगलापूरा अध्याय