ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 132132.2महाभारत 132.2साक्षादत्र श्वेतकेतुर्ददर्श; सरस्वतीं मानुषदेहरूपाम् वेत्स्यामि वाणीमिति संप्रवृत्तां; सरस्वतीं श्वेतकेतुर्बभाषेपिछलाअगलापूरा अध्याय