ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 131131.18महाभारत 131.18यस्तु मे दैवविहितो भक्षः क्षत्रियपुंगव तमुत्सृज महीपाल कपोतमिममेव मेपिछलाअगलापूरा अध्याय