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महाभारत 119.5

न कृष्ण धर्मश्चरितो भवाय; जन्तोरधर्मश्च पराभवाय
युधिष्ठिरो यत्र जटी महात्मा; वनाश्रयः क्लिश्यति चीरवासाः

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