ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 115115.13महाभारत 115.13न चापि भगवान्वाच्यो दीयतामिति भार्गव देया मे दुहिता चेयं त्वद्विधाय महात्मनेपिछलाअगलापूरा अध्याय