ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 114114.15महाभारत 114.15सर्वाँल्लोकान्प्रपश्यामि प्रसादात्तव सुव्रत वैखानसानां जपतामेष शब्दो महात्मनाम्पिछलाअगलापूरा अध्याय