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महाभारत 113.5

लोमश उवाच
रक्षांसि तानीति निवार्य पुत्रं; विभाण्डकस्तां मृगयां बभूव
नासादयामास यदा त्र्यहेण; तदा स पर्याववृतेऽऽश्रमाय

पूरा अध्याय