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महाभारत 111.16

सर्जानशोकांस्तिलकांश्च वृक्षा;न्प्रपुष्पितानवनाम्यावभज्य
विलज्जमानेव मदाभिभूता; प्रलोभयामास सुतं महर्षेः

पूरा अध्याय