ग्रंथमहाभारतवनपर्वअध्याय 103103.18महाभारत 103.18परस्परमनुज्ञाप्य प्रणम्य मुनिपुंगवम् प्रजाः सर्वा महाराज विप्रजग्मुर्यथागतम्पिछलाअगलापूरा अध्याय