Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 67.17

युधिष्ठिर उवाच
कथं वै मद्विधो राजा स्वधर्ममनुपालयन्
आहूतो विनिवर्तेत दीव्यामि शकुने त्वया

पूरा अध्याय