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महाभारत 62.26

धर्मे स्थितो धर्मराजो महात्मा; स्वयं चेदं कथयत्विन्द्रकल्पः
ईशो वा ते यद्यनीशोऽथ वैष; वाक्यादस्य क्षिप्रमेकं भजस्व

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