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महाभारत 58.13

वैशंपायन उवाच
एवमुक्त्वा तु शकुनिस्तानक्षान्प्रत्यपद्यत
जितमित्येव शकुनिर्युधिष्ठिरमभाषत

पूरा अध्याय