Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 57.11

प्रदीप्य यः प्रदीप्ताग्निं प्राक्त्वरन्नाभिधावति
भस्मापि न स विन्देत शिष्टं क्वचन भारत

पूरा अध्याय