ग्रंथमहाभारतसभापर्वअध्याय 3535.23महाभारत 35.23एष प्रकृतिरव्यक्ता कर्ता चैव सनातनः परश्च सर्वभूतेभ्यस्तस्माद्वृद्धतमोऽच्युतःपिछलाअगलापूरा अध्याय