ग्रंथमहाभारतसभापर्वअध्याय 3030.21महाभारत 30.21स दीक्षापय गोविन्द त्वमात्मानं महाभुज त्वयीष्टवति दाशार्ह विपाप्मा भविता ह्यहम्पिछलाअगलापूरा अध्याय