Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 17.21

प्रविश्य नगरं चैव ज्ञातिसंबन्धिभिर्वृतः
अभिषिच्य जरासंधं मगधाधिपतिस्तदा
बृहद्रथो नरपतिः परां निर्वृतिमाययौ

पूरा अध्याय