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महाभारत 7.4

वसुदेव उवाच
यैर्जिता भूमिपालाश्च दैत्याश्च शतशोऽर्जुन
तान्दृष्ट्वा नेह पश्यामि जीवाम्यर्जुन दुर्मरः

पूरा अध्याय