Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 45.1

वैशंपायन उवाच
द्विवर्षोपनिवृत्तेषु पाण्डवेषु यदृच्छया
देवर्षिर्नारदो राजन्नाजगाम युधिष्ठिरम्

पूरा अध्याय