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महाभारत 12.1

धृतराष्ट्र उवाच
संधिविग्रहमप्यत्र पश्येथा राजसत्तम
द्वियोनिं त्रिविधोपायं बहुकल्पं युधिष्ठिर

पूरा अध्याय