ग्रंथमहाभारतआश्वमेधिकपर्वअध्याय 8686.1महाभारत 86.1वैशंपायन उवाच इत्युक्त्वानुययौ पार्थो हयं तं कामचारिणम् न्यवर्तत ततो वाजी येन नागाह्वयं पुरम्अगलापूरा अध्याय