Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 65.17

त्वया ह्येतत्प्रतिज्ञातमैषीके यदुनन्दन
अहं संजीवयिष्यामि मृतं जातमिति प्रभो

पूरा अध्याय