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महाभारत 58.13

पुण्यावसथवान्वीर पुण्यकृद्भिर्निषेवितः
विहारो वृष्णिवीराणां महे रैवतकस्य ह
स नगो वेश्मसंकीर्णो देवलोक इवाबभौ

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