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महाभारत 57.42

अश्व उवाच
गुरोर्गुरुं मां जानीहि ज्वलितं जातवेदसम्
त्वया ह्यहं सदा वत्स गुरोरर्थेऽभिपूजितः

पूरा अध्याय