Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 56.21

एवमेतन्महाब्रह्मन्नानृतं वदसेऽनघ
अभिज्ञानं तु किंचित्त्वं समानेतुमिहार्हसि

पूरा अध्याय