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महाभारत 52.23

वासुदेव उवाच
शृणु मे विस्तरेणेदं यद्वक्ष्ये भृगुनन्दन
गृहाणानुनयं चापि तपस्वी ह्यसि भार्गव

पूरा अध्याय