Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 46.10

चर्मवल्कलसंवीतः स्वयं प्रातरुपस्पृशेत्
अरण्यगोचरो नित्यं न ग्रामं प्रविशेत्पुनः

पूरा अध्याय