ग्रंथमहाभारतआश्वमेधिकपर्वअध्याय 2929.19महाभारत 29.19राम राम निवर्तस्व कं गुणं तात पश्यसि क्षत्रबन्धूनिमान्प्राणैर्विप्रयोज्य पुनः पुनःपिछलाअगलापूरा अध्याय