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महाभारत 22.28

अगारमद्वारमिव प्रविश्य; संकल्पभोगो विषयानविन्दन्
प्राणक्षये शान्तिमुपैति नित्यं; दारुक्षयेऽग्निर्ज्वलितो यथैव

पूरा अध्याय