ग्रंथमहाभारतआश्वमेधिकपर्वअध्याय 22.10महाभारत 2.10गोविन्द मयि या प्रीतिस्तव सा विदिता मम सौहृदेन तथा प्रेम्णा सदा मामनुकम्पसेपिछलाअगलापूरा अध्याय