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महाभारत 19.53

न ह्येतच्छ्रोतुमर्होऽन्यो मनुष्यस्त्वामृतेऽनघ
नैतदद्य सुविज्ञेयं व्यामिश्रेणान्तरात्मना

पूरा अध्याय