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महाभारत 10.33

ततो राजा जातरूपस्य राशी;न्पदे पदे कारयामास हृष्टः
द्विजातिभ्यो विसृजन्भूरि वित्तं; रराज वित्तेश इवारिहन्ता

पूरा अध्याय