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महाभारत 96.47

इन्द्र उवाच
न मया भगवँल्लोभाद्धृतं पुष्करमद्य वै
धर्मं तु श्रोतुकामेन हृतं न क्रोद्धुमर्हसि

पूरा अध्याय