Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 96.31

नाभाग उवाच
अनृतं भाषतु सदा सद्भिश्चैव विरुध्यतु
शुल्केन कन्यां ददतु यस्ते हरति पुष्करम्

पूरा अध्याय