Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 95.25

अरात्रिरत्रेः सा रात्रिर्यां नाधीते त्रिरद्य वै
अरात्रिरत्रिरित्येव नाम मे विद्धि शोभने

पूरा अध्याय