ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 8484.23महाभारत 84.23रसातलतले देवा वसत्यग्निरिति प्रभो संतापादिह संप्राप्तः पावकप्रभवादहम्पिछलाअगलापूरा अध्याय