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महाभारत 82.33

ब्रह्मोवाच
तामेवं ब्रुवतीं देवीं सुरभीं त्रिदशेश्वर
प्रत्यब्रुवं यद्देवेन्द्र तन्निबोध शचीपते

पूरा अध्याय