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महाभारत 79.1

वसिष्ठ उवाच
घृतक्षीरप्रदा गावो घृतयोन्यो घृतोद्भवाः
घृतनद्यो घृतावर्तास्ता मे सन्तु सदा गृहे

पूरा अध्याय