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महाभारत 74.34

ब्रह्मचर्यस्य तु गुणाञ्शृणु मे वसुधाधिप
आ जन्ममरणाद्यस्तु ब्रह्मचारी भवेदिह
न तस्य किंचिदप्राप्यमिति विद्धि जनाधिप

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