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महाभारत 70.17

यमोऽब्रवीन्मां न मृतोऽसि सौम्य; यमं पश्येत्याह तु त्वां तपस्वी
पिता प्रदीप्ताग्निसमानतेजा; न तच्छक्यमनृतं विप्र कर्तुम्

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