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महाभारत 57.37

भक्षान्नपानीयरसप्रदाता; सर्वानवाप्नोति रसान्प्रकामम्
प्रतिश्रयाच्छादनसंप्रदाता; प्राप्नोति तानेव न संशयोऽत्र

पूरा अध्याय