ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 3434.24महाभारत 34.24यथा महार्णवे क्षिप्त आमलोष्टो विनश्यति तथा दुश्चरितं कर्म पराभावाय कल्पतेपिछलाअगलापूरा अध्याय