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महाभारत 32.5

नारद उवाच
शृणु गोविन्द यानेतान्पूजयाम्यरिमर्दन
त्वत्तोऽन्यः कः पुमाँल्लोके श्रोतुमेतदिहार्हति

पूरा अध्याय