ग्रंथमहाभारतअनुशासनपर्वअध्याय 1717.63महाभारत 17.63लोहिताक्षो महाक्षश्च विजयाक्षो विशारदः संग्रहो निग्रहः कर्ता सर्पचीरनिवासनःपिछलाअगलापूरा अध्याय